Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.124.5: वह वहाँ देवता के समान आनन्दपूर्वक विचरण कर रहा था। उस समय माद्री अकेली सुन्दर वस्त्र धारण किए हुए उसके पीछे-पीछे चल रही थी॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.124.5 
प्रहृष्टमनसं तत्र विचरन्तं यथामरम्।
तं माद्रॺनुजगामैका वसनं बिभ्रती शुभम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वह वहाँ देवता के समान आनन्दपूर्वक विचरण कर रहा था। उस समय माद्री अकेली सुन्दर वस्त्र धारण किए हुए उसके पीछे-पीछे चल रही थी॥5॥
 
He was roaming there like a god with joy in his heart. At that time Madri was alone following him wearing beautiful clothes. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)