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mahabharat 1.124.30: 'मेरे पुत्रों के लिए मंगल कामना करते हुए, उनका पालन-पोषण करो और उन्हें प्रसन्न करो। इसके अतिरिक्त मैं तुमसे और कुछ कहने योग्य नहीं समझता।'॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.124.30 
दारकेष्वप्रमत्ता च भवेथाश्च हिता मम।
अतोऽन्यन्न प्रपश्यामि संदेष्टव्यं हि किंचन॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'मेरे पुत्रों के लिए मंगल कामना करते हुए, उनका पालन-पोषण करो और उन्हें प्रसन्न करो। इसके अतिरिक्त मैं तुमसे और कुछ कहने योग्य नहीं समझता।'॥30॥
 
'Wishing well for my sons, be careful and raise them. Apart from this, I don't think anything else is worth saying to you.'॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)