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mahabharat 1.124.3-4: पलाश, तिलक, आम, चम्पा, परिभद्रक आदि अनेक वृक्ष फल-फूलों से लदे हुए थे, जो उस वन की शोभा बढ़ा रहे थे। नाना प्रकार के जलस्रोतों और कमलों से सुशोभित उस वन के मनोहर दृश्यों को देखकर राजा पाण्डु का मन काम से भर गया।   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.124.3-4 
पलाशैस्तिलकैश्चूतैश्चम्पकै: पारिभद्रकै:।
अन्यैश्च बहुभिर्वृक्षै: फलपुष्पसमृद्धिभि:॥ ३॥
जलस्थानैश्च विविधै: पद्मिनीभिश्च शोभितम्।
पाण्डोर्वनं तत् सम्प्रेक्ष्य प्रजज्ञे हृदि मन्मथ:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पलाश, तिलक, आम, चम्पा, परिभद्रक आदि अनेक वृक्ष फल-फूलों से लदे हुए थे, जो उस वन की शोभा बढ़ा रहे थे। नाना प्रकार के जलस्रोतों और कमलों से सुशोभित उस वन के मनोहर दृश्यों को देखकर राजा पाण्डु का मन काम से भर गया।
 
Palash, Tilak, Mango, Champa, Paribhadrak and many other trees were full of fruits and flowers, which were enhancing the beauty of that forest. Seeing the beautiful scenery of that forest decorated with various types of water bodies and lotuses, King Pandu's mind was filled with lust. 3-4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)