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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.124.27 
न चाप्यहं वर्तयन्ती निर्विशेषं सुतेषु ते।
वृत्तिमार्ये चरिष्यामि स्पृशेदेनस्तथा च माम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
आर्य! मैं तुम्हारे पुत्रों के साथ अपने पुत्रों के समान व्यवहार नहीं कर पाऊँगा। ऐसा करने पर मुझे पाप लगेगा। 27.
 
Arya! I will not be able to treat your sons like my own sons. In that case, I will commit a sin. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)