Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.124.21: 'बाह्लीक की राजकुमारी! तुम धन्य हो, मुझसे भी अधिक सौभाग्यशाली हो, क्योंकि तुमने राजा का आनन्द से परिपूर्ण चन्द्रमा के समान मुख देखा है।'   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.124.21 
धन्या त्वमसि बाह्लीकि मत्तो भाग्यतरा तथा।
दृष्टवत्यसि यद् वक्त्रं प्रहृष्टस्य महीपते:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'बाह्लीक की राजकुमारी! तुम धन्य हो, मुझसे भी अधिक सौभाग्यशाली हो, क्योंकि तुमने राजा का आनन्द से परिपूर्ण चन्द्रमा के समान मुख देखा है।'
 
'Princess of Bahlika! You are blessed, you are more fortunate than me, because you have seen the moon-like face of the King who is filled with joy.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)