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mahabharat 1.124.17: जब वह वापस आई तो उसने देखा कि पाण्डु और माद्री भूमि पर पड़े हैं। यह देखकर कुंती का सारा शरीर शोक से भर गया और वह अत्यन्त दुःखी होकर विलाप करने लगी।   |   mahabharat अध्याय 1.124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 124: राजा पाण्डुकी मृत्यु और माद्रीका उनके साथ चितारोहण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.124.17 
दृष्ट्वा पाण्डुं च माद्रीं च शयानौ धरणीतले।
कुन्ती शोकपरीताङ्गी विललाप सुदु:खिता॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जब वह वापस आई तो उसने देखा कि पाण्डु और माद्री भूमि पर पड़े हैं। यह देखकर कुंती का सारा शरीर शोक से भर गया और वह अत्यन्त दुःखी होकर विलाप करने लगी।
 
When she came back she saw that Pandu and Madri were lying on the ground. Seeing this Kunti's whole body was filled with grief and she became very sad and started wailing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)