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mahabharat 1.123.d6: वृष्णियों ने कहा, "हे महामना वसुदेव! हम चाहते हैं कि राजा पाण्डु के पुत्र आचरणहीन न हों; अतः पाण्डु के कल्याण को ध्यान में रखते हुए आप उनके पास एक पुरोहित भेजने की कृपा करें।"   |   mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक d6
 
 
श्लोक  1.123.d6 
वृष्णय ऊचु:
न भवेरन् क्रियाहीना: पाण्डो: पुत्रा महायश:।
पाण्डो: प्रियहितान्वेषी प्रेषय त्वं पुरोहितम्॥
 
 
अनुवाद
वृष्णियों ने कहा, "हे महामना वसुदेव! हम चाहते हैं कि राजा पाण्डु के पुत्र आचरणहीन न हों; अतः पाण्डु के कल्याण को ध्यान में रखते हुए आप उनके पास एक पुरोहित भेजने की कृपा करें।"
 
The Vrishnis said, "O illustrious Vasudev! We want that the sons of King Pandu should not be without manners; therefore, keeping in mind the welfare of Pandu, please send a priest to him."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)