Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.123.d13-d16: भरत! शर्याति के वंश में पृषत् नामक एक पुत्र हुआ, जिसका नाम शुक था। वह अपने पराक्रम से शत्रुओं को त्रास देता था। एक बार शुक ने अपने धनुष के बल से समुद्र पर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी को जीत लिया था। अश्वमेध आदि सौ बड़े-बड़े यज्ञों का अनुष्ठान करके तथा समस्त देवताओं और पितरों का पूजन करके परम बुद्धिमान महात्मा राजा शुक शतश्रृंग पर्वत पर आकर शाक, फल और मूल खाकर तपस्या करने लगे। उन्हीं तपस्वी राजा ने उत्तम उपकरणों और शिक्षा द्वारा पाण्डवों की योग्यता बढ़ाई। राजा शुक के आशीर्वाद से सभी पाण्डव धनुर्वेद में पारंगत हो गए। | mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शर्याते: पृषत: पुत्र: शुको नाम परंतप:॥
येन सागरपर्यन्ता धनुषा निर्जिता मही।
अश्वमेधशतैरिष्ट्वा स महात्मा महामखै:॥
आराध्य देवता: सर्वा: पितॄनपि महामति:।
शतशृङ्गे तपस्तेपे शाकमूलफलाशन:॥
तेनोपकरणश्रेष्ठै: शिक्षया चोपबृंहिता:।
तत्प्रसादाद् धनुर्वेदे समपद्यन्त पारगा:॥
अनुवाद
भरत! शर्याति के वंश में पृषत् नामक एक पुत्र हुआ, जिसका नाम शुक था। वह अपने पराक्रम से शत्रुओं को त्रास देता था। एक बार शुक ने अपने धनुष के बल से समुद्र पर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी को जीत लिया था। अश्वमेध आदि सौ बड़े-बड़े यज्ञों का अनुष्ठान करके तथा समस्त देवताओं और पितरों का पूजन करके परम बुद्धिमान महात्मा राजा शुक शतश्रृंग पर्वत पर आकर शाक, फल और मूल खाकर तपस्या करने लगे। उन्हीं तपस्वी राजा ने उत्तम उपकरणों और शिक्षा द्वारा पाण्डवों की योग्यता बढ़ाई। राजा शुक के आशीर्वाद से सभी पाण्डव धनुर्वेद में पारंगत हो गए।
Bharat! The descendants of Sharyati had a son named Prushat, whose name was Shuka. He used to torment his enemies with his valour. Once Shuka had conquered the entire earth up to the sea with the power of his bow. After performing hundred big yagyas like Ashvamedha and worshipping all the gods and ancestors, the most intelligent Mahatma King Shuka came to Shatashringa mountain and started performing penance by eating vegetables, fruits and roots. That same ascetic king increased the ability of the Pandavas through the best equipment and education. With the blessings of King Shuka, all the Pandavas became proficient in Dhanurveda.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥