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mahabharat 1.123.8: परंतु आज इस विषय में आपकी बात सुनकर अब मैं इसके लिए प्रयत्न करूँगा। मुझे विश्वास है कि कुन्तीदेवी मेरी बात अवश्य मान लेंगी। ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.123.8 
तव त्विदं मतं मत्वा प्रयतिष्याम्यत: परम्।
मन्ये ध्रुवं मयोक्ता सा वचनं प्रतिपत्स्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
परंतु आज इस विषय में आपकी बात सुनकर अब मैं इसके लिए प्रयत्न करूँगा। मुझे विश्वास है कि कुन्तीदेवी मेरी बात अवश्य मान लेंगी। ॥8॥
 
But today, having heard your opinion on this matter, I will now make efforts for it. I am sure that Kuntidevi will certainly agree to what I say. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)