Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.123.6: 'आपकी सहपत्नी होने के कारण मेरे हृदय में एक प्रकार का अभिमान है, जो मुझे कुन्तीदेवी से कुछ मांगने में बाधा डाल रहा है; अतः यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो आप ही मेरे लिए कुन्तीदेवी को प्रेरित करें।'॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संरम्भो हि सपत्नीत्वाद् वक्तुं कुन्तिसुतां प्रति।
यदि तु त्वं प्रसन्नो मे स्वयमेनां प्रचोदय॥ ६॥
अनुवाद
'आपकी सहपत्नी होने के कारण मेरे हृदय में एक प्रकार का अभिमान है, जो मुझे कुन्तीदेवी से कुछ मांगने में बाधा डाल रहा है; अतः यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, तो आप ही मेरे लिए कुन्तीदेवी को प्रेरित करें।'॥6॥
'Being your co-wife, I have a certain pride in my heart which is hindering me from requesting something from Kuntidevi; therefore, if you are pleased with me, then you yourself should inspire Kuntidevi for me.'॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥