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mahabharat 1.123.5: 'यदि कुन्तीराजकुमारी मेरे गर्भ से सन्तान उत्पन्न कर सके तो यह मेरा बड़ा उपकार होगा और तुम्हारा भी कल्याण होगा॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.123.5 
यदि त्वपत्यसंतानं कुन्तिराजसुता मयि।
कुर्यादनुग्रहो मे स्यात् तव चापि हितं भवेत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'यदि कुन्तीराजकुमारी मेरे गर्भ से सन्तान उत्पन्न कर सके तो यह मेरा बड़ा उपकार होगा और तुम्हारा भी कल्याण होगा॥5॥
 
'If the Princess of Kunti is able to produce a child from my womb, it will be a great favour on my part and it will be of benefit to you too.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)