Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.123.4: 'परन्तु मुझे इस बात का बड़ा दुःख है कि मैं और कुन्ती देवी दोनों ही आपकी पत्नियाँ हैं, फिर भी उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया, जबकि मैं निःसंतान रही। यह सौभाग्य की बात है कि इस समय मेरे प्रियतम को कुन्ती के गर्भ से पुत्र प्राप्त हुआ है।   |   mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.123.4 
इदं तु मे महद् दु:खं तुल्यतायामपुत्रता।
दिष्टॺा त्विदानीं भर्तुर्मे कुन्त्यामप्यस्ति संतति:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'परन्तु मुझे इस बात का बड़ा दुःख है कि मैं और कुन्ती देवी दोनों ही आपकी पत्नियाँ हैं, फिर भी उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया, जबकि मैं निःसंतान रही। यह सौभाग्य की बात है कि इस समय मेरे प्रियतम को कुन्ती के गर्भ से पुत्र प्राप्त हुआ है।
 
‘But I am very saddened by the fact that Kunti Devi and I are equally your wives, yet she gave birth to a son while I remained childless. It is a matter of good fortune that at this time my beloved has received a son from Kunti's womb.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)