Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.123.32: फिर जैसे कमल जल में बढ़ता है, वैसे ही कुरुवंश की वृद्धि के लिए जो एक सौ पाँच बालक उत्पन्न हुए, वे सब-के-सब थोड़े ही समय में बड़े होकर परिपक्व हो गए ॥32॥ | mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते च पञ्च शतं चैव कुरुवंशविवर्धना:।
सर्वे ववृधुरल्पेन कालेनाप्स्विव नीरजा:॥ ३२॥
अनुवाद
फिर जैसे कमल जल में बढ़ता है, वैसे ही कुरुवंश की वृद्धि के लिए जो एक सौ पाँच बालक उत्पन्न हुए, वे सब-के-सब थोड़े ही समय में बड़े होकर परिपक्व हो गए ॥32॥
Then, just as a lotus grows in water, similarly the one hundred and five boys who were born to increase the Kuru dynasty, all grew up and became mature in a short time. ॥ 32॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि पाण्डवोत्पत्तौ त्रयोविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पाण्डवोंकी उत्पत्तिविषयक एक सौ तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २३ श्लोक मिलाकर कुल ५५ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥