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mahabharat 1.123.30-31: उनका गौरव सिंह के समान था, वे विशाल धनुष धारण किए हुए थे। उनकी चाल भी सिंह के समान थी। देवताओं के समान वीर और सिंह के समान गर्दन वाले वे महापुरुष बढ़ने लगे। उस पवित्र हिमालय की चोटी पर पले-बढ़े और बलवान होकर, वे पाण्डु पुत्र वहाँ एकत्रित होने वाले महर्षियों को चकित कर देते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  1.123.30-31 
सिंहदर्पा महेष्वासा: सिंहविक्रान्तगामिन:।
सिंहग्रीवा मनुष्येन्द्रा ववृधुर्देवविक्रमा:॥ ३०॥
विवर्धमानास्ते तत्र पुण्ये हैमवते गिरौ।
विस्मयं जनयामासुर्महर्षीणां समेयुषाम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उनका गौरव सिंह के समान था, वे विशाल धनुष धारण किए हुए थे। उनकी चाल भी सिंह के समान थी। देवताओं के समान वीर और सिंह के समान गर्दन वाले वे महापुरुष बढ़ने लगे। उस पवित्र हिमालय की चोटी पर पले-बढ़े और बलवान होकर, वे पाण्डु पुत्र वहाँ एकत्रित होने वाले महर्षियों को चकित कर देते थे।
 
Their pride was like that of a lion, they carried huge bows. Their gait was also like that of a lion. Brave as the gods and having a neck like that of a lion, those great men started growing. Growing up and becoming strong on the peak of that sacred Himalaya, those sons of Pandu used to astonish the great sages who used to assemble there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)