Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.123.23-25: वे सभी बड़े धैर्यवान, वीर्यवान, महान बलवान और पराक्रमी थे । उन महान् तेजस्वी देवरूपधारी पुत्रों को देखकर महाराज पाण्डु को बड़ी प्रसन्नता हुई । वे आनन्द में मग्न हो गए । वे सभी बालक शतश्रृंग में रहने वाले समस्त ऋषियों और ऋषिपत्नियों को प्रिय थे । तत्पश्चात् पाण्डु ने पुनः कुन्ती को माद्री से सन्तान उत्पन्न करने के लिए प्रेरित किया । 23-25॥ | mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वे सभी बड़े धैर्यवान, वीर्यवान, महान बलवान और पराक्रमी थे । उन महान् तेजस्वी देवरूपधारी पुत्रों को देखकर महाराज पाण्डु को बड़ी प्रसन्नता हुई । वे आनन्द में मग्न हो गए । वे सभी बालक शतश्रृंग में रहने वाले समस्त ऋषियों और ऋषिपत्नियों को प्रिय थे । तत्पश्चात् पाण्डु ने पुनः कुन्ती को माद्री से सन्तान उत्पन्न करने के लिए प्रेरित किया । 23-25॥
All of them were of great patience, full of semen, great strength and bravery. Maharaj Pandu felt very happy after seeing those great and bright sons in the form of gods. They became engrossed in joy. All those children were dear to all the sages and sage wives living in Shatshringa. Thereafter, Pandu again inspired Kunti to have a child from Madri. 23-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥