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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.123.22 
अनुसंवत्सरं जाता अपि ते कुरुसत्तमा:।
पाण्डुपुत्रा व्यराजन्त पञ्च संवत्सरा इव॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वे कौरव श्रेष्ठ पाण्डव प्रतिवर्ष एक-एक करके जन्म लेते थे, फिर भी दिव्य स्वभाव के होने के कारण वे एक के बाद एक पाँच संवत्सरों के समान सुन्दर लगते थे।
 
Those best of the Kurus, the Pandavas, were born one by one every year, yet being of divine nature, they looked as beautiful as the five Samvatsaras one after the other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)