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वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वाब्रवीन्माद्रीं सकृच्चिन्तय दैवतम्।
तस्मात् ते भवितापत्यमनुरूपमसंशयम्॥ १५॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे जनमेजय! राजा पाण्डु की यह बात सुनकर कुन्ती ने माद्री से कहा, 'एक बार किसी देवता का ध्यान करो, उसके द्वारा तुम्हें योग्य सन्तान की प्राप्ति होगी, इसमें संशय नहीं है।'
Vaishmpayana says: O Janamejaya! On hearing this from King Pandu, Kunti said to Madri, 'Meditate on any deity once; through him you will receive a worthy child, there is no doubt about it.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥