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mahabharat 1.123.12: ‘भामिनी! मन्त्रों में निपुण ब्राह्मण अत्यन्त कठोर तप करके भी यश के लिए गुरुओं की शरण लेते हैं।’ 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 123: नकुल और सहदेवकी उत्पत्ति तथा पाण्डु-पुत्रोंके नामकरण-संस्कार  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.123.12 
तथा मन्त्रविदो विप्रास्तपस्तप्त्वा सुदुष्करम्।
गुरूनभ्युपगच्छन्ति यशसोऽर्थाय भाविनि॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘भामिनी! मन्त्रों में निपुण ब्राह्मण अत्यन्त कठोर तप करके भी यश के लिए गुरुओं की शरण लेते हैं।’ 12॥
 
‘Bhamini! Brahmins who are experts in mantras, even after doing very rigorous penance, take refuge in their gurus for fame. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)