पाण्डु बोले - हे प्रिये! वास्तव में शास्त्रों का यही मत है। तुम जो कुछ कह रहे हो, वही सत्य है।
Pandu said - Dear! Actually this is the opinion of the scriptures. Whatever you are saying is correct.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि पाण्डवोत्पत्तौ द्वाविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें पाण्डवोंकी उत्पत्तिविषयक एक सौ बाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १० १/२ श्लोक मिलाकर कुल ८८ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)