श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  1.122.76 
पाण्डुस्तु पुनरेवैनां पुत्रलोभान्महायशा:।
वक्तुमैच्छद् धर्मपत्नीं कुन्ती त्वेनमथाब्रवीत्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर पुत्रमोह से मोहित होकर महायशस्वी राजा पाण्डु ने अपनी पत्नी कुन्ती से पुनः कुछ कहना चाहा, किन्तु कुन्ती ने उन्हें रोककर कहा -॥ 76॥
 
Thereafter the greatly illustrious King Pandu, attracted by the love for his son, wanted to say something again to his wife Kunti, but Kunti stopped him and said -॥ 76॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)