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mahabharat 1.122.75: उस महान आश्चर्य को देखकर वे महर्षि आश्चर्यचकित हो गए। तब से पाण्डवों के प्रति उनके मन में और भी अधिक प्रेम और आदर का भाव उत्पन्न हो गया।   |   mahabharat अध्याय 1.122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.122.75 
तद् दृष्ट्वा महदाश्चर्यं विस्मिता मुनिसत्तमा:।
अधिकां स्म ततो वृत्तिमवर्तन् पाण्डवान् प्रति॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
उस महान आश्चर्य को देखकर वे महर्षि आश्चर्यचकित हो गए। तब से पाण्डवों के प्रति उनके मन में और भी अधिक प्रेम और आदर का भाव उत्पन्न हो गया।
 
Seeing that great wonder, those great sages were astonished. From then on, they developed a feeling of even greater love and respect for the Pandavas. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)