श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.122.4 
विहस्य तां ततो ब्रूया: कुन्ति किं ते ददाम्यहम्।
सा तं विहस्यमानापि पुत्रं देह्यब्रवीदिदम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब धर्म ने मुस्कुराते हुए कहा, "कुंती! बताओ, मैं तुम्हें क्या दूँ?" धर्म के इस विनोदपूर्ण ढंग से पूछने पर कुंती बोली, "मुझे एक पुत्र दो।"
 
Then Dharma smiled and said, "Kunti! Tell me, what should I give you?" When Dharma asked her in this humorous manner, Kunti said, "Give me a son."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)