श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  1.122.36-37 
जातमात्रे कुमारे तु वागुवाचाशरीरिणी।
महागम्भीरनिर्घोषा नभो नादयती तदा॥ ३६॥
शृण्वतां सर्वभूतानां तेषां चाश्रमवासिनाम्।
कुन्तीमाभाष्य विस्पष्टमुवाचेदं शुचिस्मिताम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कुमार अर्जुन के उत्पन्न होते ही आकाशवाणी ने अत्यन्त गम्भीर ध्वनि से आकाश में गूँजते हुए पवित्र मुसकराती हुई कुन्तीदेवी को सम्बोधित किया और समस्त प्राणियों तथा आश्रमवासियों के सुनने में अत्यन्त स्पष्ट भाषा में कहा - ॥36-37॥
 
As soon as Kumar Arjuna was born, the voice of the sky, resonating across the sky with a very solemn sound, addressed the holy smiling goddess Kuntidevi and said in a very clear language in the hearing of all the living beings and the people of the ashram - ॥ 36-37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)