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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति
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श्लोक 35
श्लोक
1.122.35
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्ता तत: शक्रमाजुहाव यशस्विनी।
अथाजगाम देवेन्द्रो जनयामास चार्जुनम्॥ ३५॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - महाराज पाण्डु के ऐसा कहने पर यशस्वी कुन्ती ने इन्द्र का आवाहन किया। तत्पश्चात् देवराज इन्द्र ने आकर अर्जुन को जन्म दिया ॥35॥
Vaishampayanji says - On these words of Maharaj Pandu, the famous Kunti invoked Indra. Thereafter Devraj Indra came and gave birth to Arjun. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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