श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.122.34 
पुत्रं जनय सुश्रोणि धाम क्षत्रियतेजसाम्।
लब्ध: प्रसादो देवेन्द्रात् तमाह्वय शुचिस्मिते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'सुश्रोणि! अब ऐसे पुत्र को जन्म दो जो क्षत्रिय-तुल्य तेज का भण्डार हो। हे शुद्ध मुस्कान वाली कुन्ती! मुझे देवेन्द्र का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है। अब तुम उन्हीं का आह्वान करो।'॥34॥
 
'Sushroni! Now give birth to such a son who is a repository of Kshatriya-like brilliance. Kunti with a pure smile! I have received the blessings of Devendra. Now you invoke him only.'॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)