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mahabharat 1.122.29-30h: वह ब्राह्मण, गौ और मित्रों की मनोवांछित कामनाओं को पूर्ण करने वाला, शत्रुओं को दुःख देने वाला और समस्त बन्धु-बान्धवों को सुखी करने वाला होगा, मैं तुम्हें समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला श्रेष्ठ पुत्र दूँगा॥29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  1.122.29-30h 
ब्राह्मणानां गवां चैव सुहृदां चार्थसाधकम्।
दुर्हृदां शोकजननं सर्वबान्धवनन्दनम्॥ २९॥
सुतं तेऽग्रॺं प्रदास्यामि सर्वामित्रविनाशनम्।
 
 
अनुवाद
वह ब्राह्मण, गौ और मित्रों की मनोवांछित कामनाओं को पूर्ण करने वाला, शत्रुओं को दुःख देने वाला और समस्त बन्धु-बान्धवों को सुखी करने वाला होगा, मैं तुम्हें समस्त शत्रुओं का नाश करने वाला श्रेष्ठ पुत्र दूँगा॥29 1/2॥
 
He will be the one who will fulfill the desired wishes of Brahmins, cows and friends, will give grief to the enemies and will make all the relatives happy, I will give you the best son who will destroy all the enemies. 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)