इन्द्रो हि राजा देवानां प्रधान इति न: श्रुतम्।
अप्रमेयबलोत्साहो वीर्यवानमितद्युति:॥ २२॥
तं तोषयित्वा तपसा पुत्रं लप्स्ये महाबलम्।
यं दास्यति स मे पुत्रं स वरीयान् भविष्यति॥ २३॥
अमानुषान् मानुषांश्च संग्रामे स हनिष्यति।
कर्मणा मनसा वाचा तस्मात् तप्स्ये महत् तप:॥ २४॥
अनुवाद
मैंने सुना है कि देवराज इन्द्र समस्त देवताओं में प्रधान हैं, उनमें अपार बल और उत्साह है। वे अत्यंत पराक्रमी एवं अत्यन्त तेजस्वी हैं। मैं तपस्या द्वारा उन्हें संतुष्ट करके एक अत्यंत शक्तिशाली पुत्र प्राप्त करूँगा। वे मुझे जो पुत्र देंगे, वह अवश्य ही श्रेष्ठ होगा तथा युद्ध में उनका सामना करने वाले मनुष्यों एवं मनुष्येतर प्राणियों (दैत्यों, दानवों आदि) का संहार करने में समर्थ होगा। अतः मैं मन, वाणी और कर्म से अत्यन्त कठोर तपस्या करूँगा।
I have heard that Devraj Indra is the chief among all the gods, he has immense strength and enthusiasm. He is very powerful and immensely radiant. I will satisfy him through penance and obtain a very powerful son. The son he will give me will definitely be the best and will be capable of killing the humans and non-human creatures (demons, devils etc.) who face him in battle. Therefore, I will perform very heavy penance through mind, speech and action.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)