vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति
»
श्लोक 21
श्लोक
1.122.21
दैवे पुरुषकारे च लोकोऽयं सम्प्रतिष्ठित:।
तत्र दैवं तु विधिना कालयुक्तेन लभ्यते॥ २१॥
अनुवाद
यह संसार भाग्य और पुरुषार्थ पर निर्भर है। इसमें भाग्य तभी सरल (सफल) होता है जब सही समय पर प्रयास किया जाए।
This world is dependent on destiny and efforts. In these, destiny becomes easy (successful) only when efforts are made at the right time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×