श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.122.21 
दैवे पुरुषकारे च लोकोऽयं सम्प्रतिष्ठित:।
तत्र दैवं तु विधिना कालयुक्तेन लभ्यते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यह संसार भाग्य और पुरुषार्थ पर निर्भर है। इसमें भाग्य तभी सरल (सफल) होता है जब सही समय पर प्रयास किया जाए।
 
This world is dependent on destiny and efforts. In these, destiny becomes easy (successful) only when efforts are made at the right time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)