vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति
»
श्लोक 2
श्लोक
1.122.2
सा बलिं त्वरिता देवी धर्मायोपजहार ह।
जजाप विधिवज्जप्यं दत्तं दुर्वाससा पुरा॥ २॥
अनुवाद
देवी कुंती ने उत्सुकतापूर्वक धर्मदेवता की पूजा की और तत्पश्चात महर्षि दुर्वासा द्वारा पूर्व में दिए गए मंत्र का पाठ किया।
Devi Kunti eagerly offered the offerings of worship to the deity of Dharma. Thereafter she recited the mantra given by Maharishi Durvasa in the past.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×