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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 122: युधिष्ठिर, भीम और अर्जुनकी उत्पत्ति
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श्लोक 12
श्लोक
1.122.12
ततस्तामागतो वायुर्मृगारूढो महाबल:।
किं ते कुन्ति ददाम्यद्य ब्रूहि यत् ते हृदि स्थितम्॥ १२॥
अनुवाद
तब महाबली वायु मृग पर सवार होकर कुन्ती के पास आए और बोले, 'कुन्ती! जो कुछ तुम्हारी इच्छा हो, वह मुझसे कहो। मैं तुम्हें क्या दूँ?'॥12॥
Then the mighty Vayu came to Kunti riding on a deer and said, 'Kunti! Tell me whatever you desire. What should I give you?'॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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