Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.121.d3-d4h: ‘महाराज! उस परम यशस्वी ऋषि द्वारा मुझे दी गई विद्या का आह्वान करने से कोई भी देवता आकर आपको देवतुल्य पुत्र प्रदान करेगा, जो आपके सन्तानहीनता के दुःख को दूर करेगा; इस प्रकार मुझे सन्तान की प्राप्ति होगी और आपकी पुत्र प्राप्ति की इच्छा पूरी होगी। | mahabharat अध्याय 1.121: पाण्डुका कुन्तीको समझाना और कुन्तीका पतिकी आज्ञासे पुत्रोत्पत्तिके लिये धर्मदेवताका आवाहन करनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(यां मे विद्यां महाराज अददात् स महायशा:।
तयाहूत: सुर: पुत्रं प्रदास्यति सुरोपमम्।
अनपत्यकृतं यस्ते शोकं हि व्यपनेष्यति॥
अपत्यकाम एवं स्यान्ममापत्यं भवेदिति।)
अनुवाद
‘महाराज! उस परम यशस्वी ऋषि द्वारा मुझे दी गई विद्या का आह्वान करने से कोई भी देवता आकर आपको देवतुल्य पुत्र प्रदान करेगा, जो आपके सन्तानहीनता के दुःख को दूर करेगा; इस प्रकार मुझे सन्तान की प्राप्ति होगी और आपकी पुत्र प्राप्ति की इच्छा पूरी होगी।
‘Maharaj! By invoking the knowledge imparted to me by that highly renowned sage, any deity will come and give you a son like a god, who will remove your sorrow due to not having children; in this way I will get a child and your wish of having a son will be fulfilled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥