Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.121.d1-d2: भरतश्रेष्ठ! क्षत्रियश्रेष्ठ! स्त्रियों के लिए यह बहुत ही अधर्म है कि उनके पति उनसे बार-बार सुखी रहने का अनुरोध करें; क्योंकि स्त्री का कर्तव्य है कि वह अपने पति को प्रसन्न रखे। महाबाहो! मेरी बात सुनो। इससे तुम्हें बहुत सुख मिलेगा। | mahabharat अध्याय 1.121: पाण्डुका कुन्तीको समझाना और कुन्तीका पतिकी आज्ञासे पुत्रोत्पत्तिके लिये धर्मदेवताका आवाहन करनेके लिये उद्यत होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतश्रेष्ठ! क्षत्रियश्रेष्ठ! स्त्रियों के लिए यह बहुत ही अधर्म है कि उनके पति उनसे बार-बार सुखी रहने का अनुरोध करें; क्योंकि स्त्री का कर्तव्य है कि वह अपने पति को प्रसन्न रखे। महाबाहो! मेरी बात सुनो। इससे तुम्हें बहुत सुख मिलेगा।
‘Bharat's best! Kshatriya's best! It is a very unrighteous thing for women that their husbands repeatedly request them to be happy; because it is the duty of a woman to keep her husband happy. Mahabaho! Listen to me. This will make you very happy.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥