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mahabharat 1.120.5: मैं आपके अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के साथ समागम की कल्पना भी नहीं कर सकती, फिर इस पृथ्वी पर आपसे श्रेष्ठ और कौन है?॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.120.5 
न ह्यहं मनसाप्यन्यं गच्छेयं त्वदृते नरम्।
त्वत्त: प्रतिविशिष्टश्च कोऽन्योऽस्ति भुवि मानव:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मैं आपके अतिरिक्त किसी अन्य पुरुष के साथ समागम की कल्पना भी नहीं कर सकती, फिर इस पृथ्वी पर आपसे श्रेष्ठ और कौन है?॥5॥
 
‘I cannot even think of having intercourse with any other man except you. Then who else on this earth is better than you?॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)