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mahabharat 1.120.32: कुन्ती बोली - महाराज ! इस प्रकार जब वह राजा के शव से लिपटकर बार-बार अनेक प्रकार से विलाप करने लगी, तब आकाशवाणी हुई -॥32॥   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.120.32 
कुन्त्युवाच
एवं बहुविधं तस्यां विलपन्त्यां पुन: पुन:।
तं शवं सम्परिष्वज्य वाक् किलान्तर्हिताब्रवीत्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती बोली - महाराज ! इस प्रकार जब वह राजा के शव से लिपटकर बार-बार अनेक प्रकार से विलाप करने लगी, तब आकाशवाणी हुई -॥32॥
 
Kunti said - Maharaj! In this way, when she embraced the corpse of the king and started lamenting in many ways again and again, then a voice from the sky said -॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)