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mahabharat 1.120.31: हे नरेश्वर! आज आप मुझे दर्शन दीजिए और इस दीन दुःखी कन्या को, जो करुण विलाप कर रही है, अपना कर्तव्य निभाने का आदेश दीजिए॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.120.31 
दर्शयस्व नरव्याघ्र शाधि मामसुखान्विताम्।
कृपणां चाथ करुणं विलपन्तीं नरेश्वर॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे नरेश्वर! आज आप मुझे दर्शन दीजिए और इस दीन दुःखी कन्या को, जो करुण विलाप कर रही है, अपना कर्तव्य निभाने का आदेश दीजिए॥31॥
 
The best Nareshwar! Today give me your darshan and order for my duty to this poor and sad girl who is wailing pitifully. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)