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mahabharat 1.120.26: हे कमलनेत्र महाराज! आज से आपके बिना मैं हृदय को कष्ट देने वाले दुःखों और मानसिक चिंताओं से ग्रस्त हो जाऊँगा॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.120.26 
अद्यप्रभृति मां राजन् कष्टा हृदयशोषणा:।
आधयोऽभिभविष्यन्ति त्वामृते पुष्करेक्षण॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे कमलनेत्र महाराज! आज से आपके बिना मैं हृदय को कष्ट देने वाले दुःखों और मानसिक चिंताओं से ग्रस्त हो जाऊँगा॥ 26॥
 
O lotus-eyed Maharaja! Without you, from today onwards, I will be tormented by heart-wrenching pains and mental worries. ॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)