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mahabharat 1.120.25: राजन! मैं छाया की तरह आपके पीछे चलूँगा और सदैव आपकी आज्ञा में रहूँगा। बाघ! मैं सदैव आपके कल्याण के लिए समर्पित रहूँगा। 25.   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.120.25 
छायेवानुगता राजन् सततं वशवर्तिनी।
भविष्यामि नरव्याघ्र नित्यं प्रियहिते रता॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजन! मैं छाया की तरह आपके पीछे चलूँगा और सदैव आपकी आज्ञा में रहूँगा। बाघ! मैं सदैव आपके कल्याण के लिए समर्पित रहूँगा। 25.
 
King! I will follow you like a shadow and will always be under your command. Tiger! I will always be devoted to your welfare. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)