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mahabharat 1.120.2: हे धर्मज्ञ! मुझसे किसी भी प्रकार ऐसी बात न कहो; मैं तुम्हारी पत्नी हूँ और कमल के समान नेत्रों वाले तुम पर मेरा स्नेह है॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 120: कुन्तीका पाण्डुको व्युषिताश्वके मृत शरीरसे उसकी पतिव्रता पत्नी भद्राके द्वारा पुत्र-प्राप्तिका कथन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.120.2 
न मामर्हसि धर्मज्ञ वक्तुमेवं कथंचन।
धर्मपत्नीमभिरतां त्वयि राजीवलोचने॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे धर्मज्ञ! मुझसे किसी भी प्रकार ऐसी बात न कहो; मैं तुम्हारी पत्नी हूँ और कमल के समान नेत्रों वाले तुम पर मेरा स्नेह है॥ 2॥
 
'O Dharmajnya! Do not say such things to me in any case; I am your wife and I have affection for you who have eyes like lotus flowers.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)