Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.12.5-6: गिरते ही उसे बड़ी मूर्छा आ गई। उसकी चेतना लगभग लुप्त हो गई। ऋषि के सत्य वचनों का बार-बार चिंतन करते हुए रुरु को होश आया और वह घर लौट आया। उस समय उसने अपने पिता को वे सारी बातें बताईं और उनसे आस्तिक की कथा भी पूछी। रुरु के पूछने पर उसके पिता ने उसे सब कुछ बता दिया॥5-6॥ | mahabharat अध्याय 1.12: जनमेजयके सर्पसत्रके विषयमें रुरुकी जिज्ञासा और पिताद्वारा उसकी पूर्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गिरते ही उसे बड़ी मूर्छा आ गई। उसकी चेतना लगभग लुप्त हो गई। ऋषि के सत्य वचनों का बार-बार चिंतन करते हुए रुरु को होश आया और वह घर लौट आया। उस समय उसने अपने पिता को वे सारी बातें बताईं और उनसे आस्तिक की कथा भी पूछी। रुरु के पूछने पर उसके पिता ने उसे सब कुछ बता दिया॥5-6॥
On falling he was overcome by a great unconsciousness. His consciousness almost vanished. Thinking again and again about the true words of the sage, Ruru came to his senses and returned home. At that time he told all those things to his father and also asked him about the story of Aastik. On Ruru's asking his father his father told him everything.॥ 5-6॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि सर्पसत्रप्रस्तावनायां द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत पौलोमपर्वमें सर्पसत्रप्रस्तावनाविषयक बारहवाँ
अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥