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mahabharat 1.12.3: ऋषि ने कहा- ‘रुरो! तुम कथावाचक ब्राह्मणों के मुख से आस्तिक के महान चरित्र को सुनोगे।’ ऐसा कहकर सहस्रपाद मुनि अन्तर्धान हो गए॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.12: जनमेजयके सर्पसत्रके विषयमें रुरुकी जिज्ञासा और पिताद्वारा उसकी पूर्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 12: जनमेजयके सर्पसत्रके विषयमें रुरुकी जिज्ञासा और पिताद्वारा उसकी पूर्ति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.12.3 
ऋषिरुवाच
श्रोष्यसि त्वं रुरो सर्वमास्तीकचरितं महत्।
ब्राह्मणानां कथयतामित्युक्त्वान्तरधीयत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
ऋषि ने कहा- ‘रुरो! तुम कथावाचक ब्राह्मणों के मुख से आस्तिक के महान चरित्र को सुनोगे।’ ऐसा कहकर सहस्रपाद मुनि अन्तर्धान हो गए॥3॥
 
The sage said- 'Ruro! You will hear the great character of the believer from the mouth of the storyteller Brahmins.' Saying this, Sahasrapada Muni disappeared. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)