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mahabharat 1.12.2: विप्रवर! परम बुद्धिमान महात्मा आस्तिक ने उस यज्ञ से सर्पों को क्यों बचाया? मैं यह सब कुछ पूरी तरह सुनना चाहता हूँ। 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.12: जनमेजयके सर्पसत्रके विषयमें रुरुकी जिज्ञासा और पिताद्वारा उसकी पूर्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 12: जनमेजयके सर्पसत्रके विषयमें रुरुकी जिज्ञासा और पिताद्वारा उसकी पूर्ति  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.12.2 
किमर्थं मोक्षिताश्चैव पन्नगास्तेन धीमता।
आस्तीकेन द्विजश्रेष्ठ श्रोतुमिच्छाम्यशेषत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! परम बुद्धिमान महात्मा आस्तिक ने उस यज्ञ से सर्पों को क्यों बचाया? मैं यह सब कुछ पूरी तरह सुनना चाहता हूँ। 2॥
 
Vipravara! Why did the most intelligent Mahatma Astika save the snakes from that yagya? I want to hear all this completely. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)