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mahabharat 1.119.7: ऋषि बोले - हे राजन! आज ब्रह्मलोक में महान देवताओं, ऋषियों और महामनस्वी पितरों का एक बहुत बड़ा समूह एकत्रित होने वाला है। अतः हम लोग स्वयंभू ब्रह्मा के दर्शन हेतु वहाँ चलेंगे।   |   mahabharat अध्याय 1.119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.119.7 
ऋषय ऊचु:
समवायो महानद्य ब्रह्मलोके महात्मनाम्।
देवानां च ऋषीणां च पितॄणां च महात्मनाम्।
वयं तत्र गमिष्यामो द्रष्टुकामा: स्वयम्भुवम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले - हे राजन! आज ब्रह्मलोक में महान देवताओं, ऋषियों और महामनस्वी पितरों का एक बहुत बड़ा समूह एकत्रित होने वाला है। अतः हम लोग स्वयंभू ब्रह्मा के दर्शन हेतु वहाँ चलेंगे।
 
The sage said - O King! Today a very large group of great Gods, sages and great-minded ancestors are going to gather in Brahmaloka. Therefore, we will go there to have the darshan of Swayambhu Brahma. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)