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mahabharat 1.119.3: अनेक ऋषिगण उसे भाई के समान प्रेम करते थे। अनेक ऋषियों से उसकी मित्रता हो गई और अनेक ऋषिगण उसे अपने पुत्र के समान मानते थे और सदैव उसकी रक्षा करते थे।   |   mahabharat अध्याय 1.119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.119.3 
केषांचिदभवद् भ्राता केषांचिदभवत् सखा।
ऋषयस्त्वपरे चैनं पुत्रवत् पर्यपालयन्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
अनेक ऋषिगण उसे भाई के समान प्रेम करते थे। अनेक ऋषियों से उसकी मित्रता हो गई और अनेक ऋषिगण उसे अपने पुत्र के समान मानते थे और सदैव उसकी रक्षा करते थे।
 
Many sages loved him like a brother. He became friends with many and many other sages considered him like their own son and always protected him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)