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mahabharat 1.119.27: वे जानते थे कि मृगरूपी ऋषि के शाप के कारण उनकी सन्तान प्राप्ति की चेष्टा नष्ट हो गई है। एक दिन वे अपनी सुप्रतिष्ठित पत्नी कुन्ती से एकान्त में इस प्रकार बोले - 'देवि! यह हमारे लिए संकट का समय है, इस समय सन्तान प्राप्ति के लिए जो भी प्रयत्न आवश्यक हों, कृपया उनका सहयोग करें॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 1.119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.119.27 
आत्मनो मृगशापेन जानन्नुपहतां क्रियाम्।
सोऽब्रवीद् विजने कुन्तीं धर्मपत्नीं यशस्विनीम्।
अपत्योत्पादने यत्नमापदि त्वं समर्थय॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वे जानते थे कि मृगरूपी ऋषि के शाप के कारण उनकी सन्तान प्राप्ति की चेष्टा नष्ट हो गई है। एक दिन वे अपनी सुप्रतिष्ठित पत्नी कुन्ती से एकान्त में इस प्रकार बोले - 'देवि! यह हमारे लिए संकट का समय है, इस समय सन्तान प्राप्ति के लिए जो भी प्रयत्न आवश्यक हों, कृपया उनका सहयोग करें॥ 27॥
 
He knew that due to the curse of the sage who had taken the form of a deer, his efforts to have children had been destroyed. One day he spoke to his illustrious wife Kunti in private in this manner - 'Devi! This is a time of crisis for us, please support whatever efforts are necessary for having children at this time.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)