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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.119.26 
वैशम्पायन उवाच
तच्छ्रुत्वा तापसवच: पाण्डुश्चिन्तापरोऽभवत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! तपस्वी मुनियों की यह बात सुनकर राजा पाण्डु गहन विचार में पड़ गए।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of the ascetic sages, King Pandu fell into deep thought. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)