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mahabharat 1.119.23-24: ऋषि बोले- हे धर्मात्मा राजा! हम दिव्य दृष्टि से जानते हैं कि तुम्हारी संतान देवताओं के समान पापरहित और शुभ होगी। हे व्याघ्र! तुम भाग्य द्वारा दिए गए फल को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करो॥ 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 1.119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 119: पाण्डुका कुन्तीको पुत्र-प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका आदेश  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  1.119.23-24 
ऋषय ऊचु:
अस्ति वै तव धर्मात्मन् विद्मो देवोपमं शुभम्॥ २३॥
अपत्यमनघं राजन् वयं दिव्येन चक्षुषा।
दैवोद्दिष्टं नरव्याघ्र कर्मणेहोपपादय॥ २४॥
 
 
अनुवाद
ऋषि बोले- हे धर्मात्मा राजा! हम दिव्य दृष्टि से जानते हैं कि तुम्हारी संतान देवताओं के समान पापरहित और शुभ होगी। हे व्याघ्र! तुम भाग्य द्वारा दिए गए फल को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करो॥ 23-24॥
 
The sage said— O righteous king! We know this through divine sight that you will have a sinless and auspicious child like the gods. O tiger! Make efforts to achieve the fruit that destiny has given you.॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)