Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.118.9: अथवा वृक्षों का आधार ही मेरा निवास होगा। मैं प्रिय और अप्रिय सभी प्रकार की वस्तुओं का त्याग कर दूँगा। न तो किसी के वियोग में शोक करूँगा, न किसी की प्राप्ति या मिलन में प्रसन्न होऊँगा। निन्दा और स्तुति दोनों ही मेरे लिए समान होंगी॥9॥ | mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृक्षमूलनिकेतो वा त्यक्तसर्वप्रियाप्रिय:।
न शोचन् न प्रहृष्यंश्च तुल्यनिन्दात्मसंस्तुति:॥ ९॥
अनुवाद
अथवा वृक्षों का आधार ही मेरा निवास होगा। मैं प्रिय और अप्रिय सभी प्रकार की वस्तुओं का त्याग कर दूँगा। न तो किसी के वियोग में शोक करूँगा, न किसी की प्राप्ति या मिलन में प्रसन्न होऊँगा। निन्दा और स्तुति दोनों ही मेरे लिए समान होंगी॥9॥
Or the base of the trees will be my abode. I will give up all kinds of things, dear and unpleasant. I will neither grieve on the separation from anyone nor will I be happy on the attainment or union of anyone. Both criticism and praise will be the same for me.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥