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mahabharat 1.118.40-41h: 'तुम सब लोग हस्तिनापुर जाकर कहो कि कुरुनन्दन राजा पाण्डु धन, काम, काम-भोग और स्त्रियों के साथ मैथुन आदि सब कुछ त्यागकर अपनी पत्नियों सहित वानप्रस्थ को चले गए हैं ॥40 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 40-41h
 
 
श्लोक  1.118.40-41h 
गत्वा नागपुरं वाच्यं पाण्डु: प्रव्रजितो वनम्।
अर्थं कामं सुखं चैव रतिं च परमात्मिकाम्॥ ४०॥
प्रतस्थे सर्वमुत्सृज्य सभार्य: कुरुनन्दन:।
 
 
अनुवाद
'तुम सब लोग हस्तिनापुर जाकर कहो कि कुरुनन्दन राजा पाण्डु धन, काम, काम-भोग और स्त्रियों के साथ मैथुन आदि सब कुछ त्यागकर अपनी पत्नियों सहित वानप्रस्थ को चले गए हैं ॥40 1/2॥
 
'You all go to Hastinapur and tell that Kurunandan King Pandu has left everything like wealth, work, sexual pleasures and sexual intercourse with women etc. and has gone to Vanaprastha along with his wives. 40 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)