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mahabharat 1.118.29: 'हम दोनों समस्त विषय-सुखों का त्याग करेंगी और पतिलोक प्राप्ति के परम लक्ष्य से अपनी समस्त इन्द्रियों को वश में रखते हुए घोर तपस्या करेंगी।   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.118.29 
प्रणिधायेन्द्रियग्रामं भर्तृलोकपरायणे।
त्यक्तकामसुखे ह्यावां तप्स्यावो विपुलं तप:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'हम दोनों समस्त विषय-सुखों का त्याग करेंगी और पतिलोक प्राप्ति के परम लक्ष्य से अपनी समस्त इन्द्रियों को वश में रखते हुए घोर तपस्या करेंगी।
 
'Both of us will renounce all sensual pleasures and with the ultimate goal of attaining the husband's world, we will perform severe penance while controlling all our senses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)