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mahabharat 1.118.24-25: '(देवियों! तुम दोनों हस्तिनापुर लौट जाओ और माता अम्बिका, अम्बालिका, भाई विदुर, संजय, भाइयों सहित राजा धृतराष्ट्र, दादी सत्यवती, चाचा भीष्मजी, राजपुरोहितों, कठोर व्रत करने वाले और सोमपान करने वाले महात्मा ब्राह्मणों तथा वहाँ हम पर आश्रित रहने वाले वृद्ध ग्रामवासियों आदि को प्रसन्न करके कहो कि, 'राजा पाण्डु, आप साधु बन जाओ और वन में चले जाओ।' ॥24-25॥   |   mahabharat अध्याय 1.118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 118: पाण्डुका अनुताप, संन्यास लेनेका निश्चय तथा पत्नियोंके अनुरोधसे वानप्रस्थ-आश्रममें प्रवेश  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  1.118.24-25 
कौसल्या विदुर: क्षत्ता राजा च सह बन्धुभि:।
आर्या सत्यवती भीष्मस्ते च राजपुरोहिता:॥ २४॥
ब्राह्मणाश्च महात्मान: सोमपा: संशितव्रता:।
पौरवृद्धाश्च ये तत्र निवसन्त्यस्मदाश्रया:।
प्रसाद्य सर्वे वक्तव्या: पाण्डु: प्रव्रजितो वनम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'(देवियों! तुम दोनों हस्तिनापुर लौट जाओ और माता अम्बिका, अम्बालिका, भाई विदुर, संजय, भाइयों सहित राजा धृतराष्ट्र, दादी सत्यवती, चाचा भीष्मजी, राजपुरोहितों, कठोर व्रत करने वाले और सोमपान करने वाले महात्मा ब्राह्मणों तथा वहाँ हम पर आश्रित रहने वाले वृद्ध ग्रामवासियों आदि को प्रसन्न करके कहो कि, 'राजा पाण्डु, आप साधु बन जाओ और वन में चले जाओ।' ॥24-25॥
 
'(Ladies! Both of you return to Hastinapur and please mother Ambika, Ambalika, brother Vidur, Sanjay, King Dhritarashtra with his brothers, grandmother Satyavati, uncle Bhishmaji, the royal priests, the Mahatma Brahmins who observe strict fasts and drink soma and the old villagers etc. who reside there dependent on us and say, 'King Pandu, become a monk and go to the forest. Gone'. 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)